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अहमद पटेल: 26 साल की उम्र में पहुंचे थे लोकसभा, राजीव के बाद सोनिया के भी बने चाणक्य


अहमद पटेल लगातार 5वीं बार राज्यसभा पहुंचे हैं. इस चुनाव में कुल 176 वोट किए गए थे, जिनमें से 2 वोट रद्द होने के बाद 174 की काउंटिंग की गई. अहमद पटेल ने 44 वोट हासिल कर जीत दर्ज की.

गुजरात में तीन सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में से 2 सीट बीजेपी के नाम रही. लेकिन जिस एक सीट को जीतने के लिए बीजेपी ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया दिया, उसमें BJP की हार हुई. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल इस लड़ाई में सबसे बड़े लड़ैया साबित हुए. इस लड़ाई में सीधी टक्कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और अहमद पटेल के बीच थी.

अहमद पटेल लगातार 5वीं बार राज्यसभा पहुंचे हैं. इस चुनाव में कुल 176 वोट किए गए थे, जिनमें से 2 वोट रद्द होने के बाद 174 की काउंटिंग की गई. अहमद पटेल ने 44 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार बलवंत राजपूत को शिकस्त दी. अहमद पटेल कांग्रेस के बड़े रणनीतिकारों में से एक रहे हैं, पढ़ें अभी तक का उनका पूरा राजनीतिक सफर –

– अहमद पटेल 1977 में 26 साल की उम्र में भरुच से लोकसभा चुनाव जीतकर तब के सबसे युवा सांसद बने थे. वे 1993 से राज्यसभा सदस्य हैं. अहमद पर्दे के पीछे की राजनीति में भरोसा करते रहे हैं. इसलिए कभी भी सामने आ कर राजनीति नहीं की.

– अहमद पटेल 1977 से 1982 तक गुजरात की यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे. सितंबर 1983 से दिसंबर 1984 तक वो ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी रहे. 1985 में जनवरी से सितंबर तक वो प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव रहे.

– अहमद पटेल सितंबर 1985 से जनवरी 1986 तक पटेल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रहे. जनवरी 1986 में गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष बने और अक्टूबर 1988 तक इस पद पर रहे.

– 1991 में जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने, तो अहमद पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया. 1996 में उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था. उस समय सीताराम केसरी कांग्रेस के अध्यक्ष थे. 2000 सोनिया गांधी के निजी सचिव वी जॉर्ज से मनमुटाव होने के बाद उन्होंने ये पद छोड़ दिया था. बाद में 2001 में सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बन गए.

– पटेल को 2004 व 2009 के लोकसभा चुनावों में यूपीए को जीत दिलाने का अहम रणनीतिकार माना जाता है. मनमोहन सिंह सरकार के कई अहम फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाते थे.

– बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह व अहमद पटेल के बीच पुरानी अदावत है. माना जाता है कि तत्कालीन संप्रग सरकार ने पटेल के इशारे पर शाह को इस मामले में घेरा था. जानकारों का कहना है कि गुजरात में पटेलों को बीजेपी के खिलाफ लाने पर अहमद की खास भूमिका रही है.

– अहमद पटेल वह अहसान जाफरी के बाद गुजरात के ऐसे दूसरे मुस्लिम नेता हैं जो लोकसभा के लिए राज्‍य से चुने गए. मीडिया से आमतौर पर दूर रहने वाले पटेल यूपीए सरकार के दौरान कांग्रेस के दूसरे ‘सबसे शक्तिशाली नेता’ माने जाते थे.

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