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पैंगोंग झील में चीनी जहाजों का मुकाबला करने के लिए तैनात होंगी विशेष नावें

पैंगोंग झील में सर्दियों के चलते अगले तीन महीनों तक बर्फ जमी रहेगी. गर्मियों तक झील में गश्त शुरू होने का समय आएगा, तब तक उम्मीद है कि नई बोट्स की तैनाती हो जाएगी.

भारत पैंगोंग झील में अपनी पेट्रोलिंग क्षमता बढ़ाने जा रहा है. सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि विशेष क्षमताओं वाली दो दर्जन स्वदेशी बोट्स जल्दी ही 14,000 फीट की ऊंचाई पर पैंगोंग झील तक पहुंच जाएंगी. ये बोट्स एंटी-रैमिंग क्षमताओं से लैस होंगी और इनमें ज्यादा सैनिकों को ढोने की क्षमता होगी.

दरअसल, भारतीय सेना फिलहाल पेट्रालिंग बोट्स का इस्तेमाल करती है, लेकिन ये चीन द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नौकाओं की क्षमता और ताकत का मुकाबला करने के लिए नाकाफी हैं. एक आधिकारी ने बताया है कि नई बोट्स भारत में ही बनाई जा रही हैं, जो ज्यादा क्षमता वाली और मजबूत होंगी.

सूत्रों ने कहा कि सेना की नई जरूरतों के बारे में भारतीय नौसेना से सलाह ली गई थी. इस क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़पों के बाद मौजूदा गतिरोध के बीच बोट्स की क्षमता बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई. बोट्स का इस्तेमाल झील में गश्त करने के लिए किया जाता है, जबकि सेना झील के किनारे पैदल गश्त करती है.

ज्यादा क्षमता वाली बोट्स
तेज टक्कर सहने की क्षमता के अलावा ऐसी नावों की जरूरत थी जिसमें ज्यादा सैनिकों को पेट्रोलिंग पर भेजा जा सके. फिलहाल भारत जो बोट्स इस्तेमाल कर रहा है उनकी सैनिक क्षमता 10-12 है, लेकिन नई बोट्स में 25-30 सैनिक जा सकेंगे. ये क्षमता चीन के बराबर होगी. नई बोट्स तेज स्पीड वाली होंगी ताकि उन्हें कार्रवाई में इस्तेमाल किया जा सके और पैंगोंग झील में चीनी घुसपैठ को जल्दी रोका जा सके.

सूत्रों ने कहा कि नई बोट्स एक साल के भीतर तैनाती के लिए तैयार हो जाएंगी. पैंगोंग झील में सर्दियों के चलते अगले तीन महीनों तक बर्फ जमी रहेगी. गर्मियों तक झील में गश्त शुरू होने का समय आएगा, तब तक उम्मीद है कि नई बोट्स की तैनाती हो जाएगी.

विवादित झील पर दावा करने के लिए अहम 
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार जारी गतिरोध के मद्देनजर पैंगोंग झील में गश्त के लिए इस्तेमाल की जाने वाली नावों को अपग्रेड करने की जरूरत महसूस की जा रही थी. चीनी घुसपैठ बढ़ने के कारण पैंगोंग झील में और झील के किनारे सैनिकों के बीच टकराव शुरू हुआ था. 134 किलोमीटर लंबी विवादित झील का दो-तिहाई हिस्सा चीन के नियंत्रण में है. प्रभावी रूप से भारत का नियंत्रण करीब 45 किलोमीटर झील पर है.

झील का विवादास्पद क्षेत्र 8 फिंगर्स में विभाजित है और भारत फिंगर 8 तक अपना क्षेत्र होने का दावा करता है. क्षेत्र की पहचान करने के तौर पर झील में ऊंची उठी हुई पहाड़ियों को सेना की भाषा में फिंगर्स कहा जाता है. दोनों सेनाओं का आमना-सामना तब होता है जब भारतीय पेट्रोलिंग टीम फिंगर 4 से आगे निकल जाती है या चीनी सैनिक अतिक्रमण करके फिंगर 2 तक आने की कोशिश करते हैं.

मौजूदा संघर्ष का केंद्र बनी झील के उत्तरी तट पर चीन ने 1999 में फिंगर 4 तक एक सड़क का निर्माण कर लिया था. इसके बाद भारतीय पैदल पेट्रोलिंग को इसे पार करने से रोक दिया गया. भारतीय सैनिकों के पास सड़क की सुविधा नहीं है क्योंकि भारतीय क्षेत्र में बनी सड़क फिंगर 4 से 1 किलोमीटर पहले ही समाप्त हो जाती है.

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ऐसे हालात में जब झील के किनारे और पहाड़ियों पर गतिरोध जारी है, बढ़ी हुई विशेष क्षमताओं वाली बोट्स का इस्तेमाल फिंगर 8 तक अपना दावा ठोकने में भारतीय सैनिकों की मदद करेगा.

मौजूदा तनाव 
भारत और चीन लद्दाख क्षेत्र में सात महीने से चल रहे तनाव में उलझे हैं, दोनों पक्षों ने काफी संख्या में सैनिक, तोपें, टैंक और बख्तरबंद वाहनों की भारी तैनाती की है. मई में पैंगोंग झील में झड़प के साथ ये तनाव शुरू हुआ था और दोनों पक्षों के सैनिक एक से ज्यादा बार आमने-सामने आए, जिसमें दोनों पक्षों के कई सैनिक घायल हुए थे. 15 जून को गालवान घाटी नाम के एक अन्य क्षेत्र में खूनी संघर्ष हुआ जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, जबकि चीनियों ने अपने हताहत सैनिकों की संख्या को सार्वजनिक नहीं किया.

इस गतिरोध का हल खोजने के लिए कोर कमांडर स्तर पर सैन्य वार्ता के आठ दौर हो चुके हैं, लेकिन गतिरोध अब भी जारी है. 6 नवंबर को हुई पिछली वार्ता में पीछे हटने की योजना पर चर्चा के बावजूद आगे कोई प्रगति नहीं हुई है. तनाव को कम करने के लिए हुई चर्चा के उपायों को लागू करने को लेकर अब तक कोई और बातचीत नहीं हुई है.

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