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योजना:बुलेट ट्रेन में अचानक बीमार होने पर यात्रियों के लिए फोल्डिंग बेड की सुविधा, शांत माहौल देने ट्रेन के लिए पूरा रेक होगा एयर टाइट

  • 320 किमी की रफ्तार से चलेगी भारतीय बुलेट ट्रेन, शुरू में हाेंगे 10 कोच, मांग होने पर कोच की संख्या और बढ़ाई जाएगी
  • अहमदाबाद-मुंबई के बीच 508 किमी के रूट पर चलेगी बुलेट ट्रेन

अहमदाबाद-मुंबई के बीच 508 किमी रूट पर चलने वाली बुलेट परियोजना का शुरूआती निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके लिए सूरत के वकताना गांव में बुलेट ट्रेन रूट बनाने के लिए जिओ टेक्नीकल कार्य शुरू हो चुका है। यह कार्य एलएंडटी द्वारा किया जा रहा है, जिसमें सबसे पहले अहमदाबाद से वडोदरा-सूरत-वापी के बीच 64 प्रतिशत हिस्से का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

साल 2023 तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना है। जापान से बुलेट ट्रेन की ई-5 सीरीज मंगाई जाएगी, जो यहां चलेगी। लेकिन भारतीय वातावरण और तापमान के अनुसार बुलेट ट्रेन के इंटीरियर में कुछ बदलाव होंगे। इसके अलावा कुछ सुविधाओं का समावेश होगा। इसके लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने जापान की बुलेट ट्रेन बनाने वाली कंपनी को सजेशन के तौर पर जरूरी बदलाव संबंधी एक पत्र देगी।

अनाउंसमेंट में स्थानीय भाषा का इस्तेमाल, ऑब्सटेकल डिटेक्शन प्रणाली भी
भारतीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए भारतीय बुलेट ट्रेन में अंग्रेजी के अलावा हिंदी, गुजराती और मराठी भाषा का अनाउंसमेंट और डिस्प्ले का प्रबंध होगा। इसके अलावा भारतीय तापमान को देखते हुए जरूरी बदलाव के तहत दरवाजे में ऑब्सटेकल सिस्टम प्रणाली होगी, इससे किसी भी तरह की समस्याओं का समय रहते पता लगा लिया जाएगा। भारतीय बुलेट ट्रेन में कुल 10 कोच के इस्तेमाल होंगे। भविष्य में मांग के मुताबिक कोच की संख्या बढ़ाई जाएगी।

बीमार होने पर यह सुविधा
यदि कोई यात्री अचानक बीमार होता है तो बुलेट ट्रेन में एक विशेष व्यवस्था बनाई जाएगी। इसमें बीमार यात्री और दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए ट्रेन के अंदर मल्टी रूम होगा, इसमें एक फोल्डिंग बेड की व्यवस्था होगी। इसके अलावा उसमे जरूरी प्राथमिक उपचार के साधन भी उपलब्ध होंगे।

एयर टाइट होगी बुलेट रेक
हाई स्पीड बुलेट ट्रेन 320 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाई जाएगी। इसके लिए यात्रियों को ट्रेन में बाहरी शोरगुल का दबाव न झेलना पड़े इसके लिए पूरी बुलेट ट्रेन की रेक को एयर टाइट बनाया जाएगा। इससे ट्रेनों में शोर को कम करने के लिए एयर टाइट फ्लोर, नॉइज इंसुलेशन पैनल आदि का इस्तेमाल होगा।

भारतीय बुलेट ट्रेन में यहां के वातावरण और तापमान के अनुसार कई बदलाव किए जाएंगे। इसकाे लेकर हम इस ट्रेन निर्माता कंपनी काे सजेशन भी देंगे, जिससे भारतीय कल्चर के अनुसार इसमें बदलाव हाे सके। अभी यह बहुत की प्राथमिक स्तर पर है। इसे लेकर काम किया जा रहा है।-सुषमा गाैड़, एजीएम, एनएचएसआरसीएल

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