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जैक मा के इस ‘खजाने’ पर थी चीनी सरकार की नजर, नहीं दिया तो शुरू हुए बुरे दिन

चीन की एजेंसियां चाहती थी ती जैक मा उपभोक्ताओं के क्रेडिट डाटा को सरकार के साथ साझा करे. इस डाटा को जैक मा की वित्तीय कंपनी ने सालों बाद इकट्ठा किया है. चीन के वित्‍तीय नियामक चाहते थे कि जैक मा की कंपनी एंट ग्रुप अपने करोड़ों ग्राहकों का कंज्‍यूमर क्रेडिट डेटा उसे सौंप दे.

चीन के अरबपति और अलीबाबा के चेयरमैन जैक मा के गायब होने की वजह अब धीरे धीरे छन-छन कर सामने आ रही है. चीनी सरकार जैक मा से उसके उपभोक्ताओं का डाटा हासिल करना चाहती थी. जैक मा इसके लिए कतई तैयार नहीं थे, इसके बाद उनके लापता होने की खबर आई है.

आज की दुनिया में डॉलर के मुकाबले डाटा का मूल्य कम नहीं है. डाटा किसी भी उद्योगपति के लिए वो स्रोत है जिससे डॉलर कमाया जाता है.

बेशकीमती डाटा चाहती थी चीनी एजेंसियां

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार चीन की एजेंसियां चाहती थी ती जैक मा उपभोक्ताओं के क्रेडिट डाटा को सरकार के साथ साझा करे. इस डाटा को जैक मा की वित्तीय कंपनी ने सालों बाद इकट्ठा किया है. चीन के वित्‍तीय नियामक चाहते थे कि जैक मा की कंपनी एंट ग्रुप अपने करोड़ों ग्राहकों का कंज्‍यूमर क्रेडिट डेटा उसे सौंप दे. इस कंपनी के मेजोरिटी शेयर जैक मा के पास है.

जैक मा अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए लगातार चीनी नियामकों के दबाव से बचने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन इस मामले में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एंट्री के बाद जैक मा के पास विकल्प कम रह गया था. दरअसल चीनी नियामकों ने जैक मा की कंपनी पर आरोप लगाया कि एंट ग्रुप अली पे का इस्तेमाल कर लाखों करोड़ों लोगों को कर्ज दे रही है इसका नुकसान छोटे बैंकों को उठाना पड़ रहा है. अली पे एप जैक मा का ही है.

जैक मा के एप अली पे के पास एक अरब लोगों का डाटा

अली पे एप को एक अरब से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं. इस एप के जरिए जैक मा के पास करोड़ों लोग के खर्च करने के आंकड़े, उधार लेने के आंकड़े और वित्तीय आदतों से जुड़े आंकड़े इकट्ठा हैं.

इन सूचनाओं के आधार पर एंट ग्रुप ने 50 करोड़ लोगों को लोन दिया है. एंट ग्रुप ने इसके लिए 100 कमर्शियल बैंकों से फंडिंग के लिए करार किया है.

लोन के जरिए अरबों कमा रहे थे जैक मा

चीन की सरकारी एजेंसियों का आरोप है कि जैक मा अपने अली पे एप के जरिए लोगों को लोन दिलवाते थे और मध्‍यस्‍थ के रूप में कमीशन कमाते थे जबकि कर्ज के डूबने का सारा रिस्‍क बैंकों के जिम्मे होता था.

चीनी नियामकों को डाटा देने से किया इनकार 

चीनी एजेंसियों का कहना है कि इस इस बिजनेस मॉडल के जरिए जैक मा के वारे न्यारे थे. लेकिन इससे चीनी सत्ता की नजर में वो अबतक चढ़ चुके थे. चीन नियामक एजेंसियों ने डाटा पर जैक के अधिकार को खत्म करने के लिए उनसे इस डाटा को मांगा, लेकिन इस खजाने को देने से जैक मा ने इनकार कर दिया.

डाटा से मना किया तो शुरू हुआ टकराव 

इसके बाद जैक मा ने चीनी के वित्तीय एजेंसियों की आलोचना करनी शुरू कर दी. इससे कम्युनिस्ट पार्टी की भौहें तन गई. इस आलोचना को कम्‍युनिस्‍ट पार्टी पर हमला माना गया. इसी के साथ ही जैक मा की कंपनी पर चीन की निरंकुश सरकार ने नकेल कसनी शुरू कर दी.

पिछले साल नवंबर में जैक मा के एंट ग्रुप के 37 अरब डॉलर के आईपीओ को निलंबित कर दिया गया. वॉल स्ट्रीट जर्नल का दावा है कि इस आईपीओ को रद्द करने का आदेश सीधा राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से आया था. इस बीच जैक मा सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर दिखने लगे और नया साल आते आते उनको लेकर तरह तरह की खबरें आने लगीं.

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